नया सवेरा
Ghazal — By Furkan S Khan
Kaafiya: सफ़र, असर, हुनर, ख़बर, नज़र, बसर | Radeef: है
कठिन राहों में भी चलता तेरा सफ़र है,
हर ठोकर से सीखे, मिलता नया असर है।
जो गिरकर उठ खड़ा हो, उसी में तो हुनर है,
न कर मायूस दिल को, बस इतनी सी ख़बर है।
कभी रुकना नहीं तुम, चाहे जो भी डगर है,
सदा आगे ही बढ़ना, यही तेरी नज़र है।
ये मंज़िल दूर नहीं, बस थोड़ा सा सबर है,
हौसले से ही तो हर मुश्किल का बसर है।
जो हिम्मत हार बैठे, उनका क्या ही गुज़र है,
अंधेरों से निकलना, खुद तेरा ही हुनर है।
Ghazal — By Furkan S Khan
Kaafiya: राह, चाह, निगाह, पनाह, थाह, आह | Radeef: है
जो दिल में हो लगन, तो हर मुश्किल की राह है,
हर मंज़िल को पाने की, इक सच्ची चाह है।
न डर तू आंधियों से, तुझमें वो ही पनाह है,
तूफ़ानों से लड़ने की, तुझमें ही तो थाह है।
जो राहों में बिछी काँटें, वो भी तो गवाह है,
तेरी हिम्मत के आगे, हर मुश्किल बेपनाह है।
अपनी मंज़िल पे रख तू, बस अपनी इक निगाह है,
ज़माने की परवाह न कर, ये तेरी खुद की चाह है।
ये दुनिया तो देखेगी, जब तेरी जीत की आह है,
तू बढ़ता चल मुसाफ़िर, तेरी ये ही तो राह है।