उदासी का आगोश

Nazm — By Furkan S Khan

Kaafiya: अंधेरा, सवेरा  |  Radeef: है
मन में एक उदासी का डेरा है, हर पल जैसे गम का पहरा है। बाहर चाहे चमके सवेरा, अंदर बस घोर अंधेरा है।

Nazm — By Furkan S Khan

Kaafiya: राज़, आवाज़  |  Radeef: है
दिल में एक खामोश एहसास है, हर लम्हा एक अनकहा फ़रियाद है। छुपाए हैं जो सारे राज़, आज फिर उठती है तेरी आवाज़ है।

Nazm — By Furkan S Khan

Kaafiya: राहें, आहें  |  Radeef: हैं
तन्हाई की ये वीरान राहें हैं, इन पर चलती बस मेरी आहें हैं। खोया हूँ मैं अपनी ही दुनिया में, बस यादें तेरी बाहें हैं।