उदासी का साया

Nazm — By Furkan S Khan

Kaafiya: गहराया, घबराया, भरमाया  |  Radeef: है
उदासी का साया गहराया है, हर खुशी से मन घबराया है। कोई तो हो जो समझे दर्द मेरा, क्यों हर पल ये दिल भरमाया है।

Nazm — By Furkan S Khan

Kaafiya: गहरी, ठहरी, बहरी  |  Radeef: है
ये खामोशी भी कितनी गहरी है, हर आहट अब तो ठहरी है। आँखों में नमी है, लबों पर सन्नाटा, क्या मेरी दुनिया अब बहरी है?

Nazm — By Furkan S Khan

Kaafiya: मेरे, तारे, सहारे
टूट गए वो सारे ख्वाब मेरे, जो कभी थे आँखों के तारे। बिखरे पड़े हैं अब हर सू, कैसे समेटूँ ये टूटे सहारे?