उदासी का साया: फरकान एस खान की हृदयस्पर्शी नाज़्म

उदासी के गहरे साए को दर्शाती फरकान एस खान की मार्मिक नाज़्म। अकेलापन और दर्द की अभिव्यक्ति।

Friday, August 28, 2026
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उदासी का साया: फरकान एस खान की हृदयस्पर्शी नाज़्म
“उदासी का साया: फरकान एस खान की हृदयस्पर्शी नाज़्म”
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https://www.vews.in/hum-aur-zindagi/udasi-ka-saya-furkan-s-khans-heartfelt-nazm
Date
28 August 2026
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Nazm By Furkan S Khan
उदासी का साया गहराया है, हर खुशी से मन घबराया है। कोई तो हो जो समझे दर्द मेरा, क्यों हर पल ये दिल भरमाया है।
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Nazm By Furkan S Khan
ये खामोशी भी कितनी गहरी है, हर आहट अब तो ठहरी है। आँखों में नमी है, लबों पर सन्नाटा, क्या मेरी दुनिया अब बहरी है?
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Nazm By Furkan S Khan
टूट गए वो सारे ख्वाब मेरे, जो कभी थे आँखों के तारे। बिखरे पड़े हैं अब हर सू, कैसे समेटूँ ये टूटे सहारे?

उदासी का साया

Nazm — By Furkan S Khan

Kaafiya: गहराया, घबराया, भरमाया  |  Radeef: है
उदासी का साया गहराया है, हर खुशी से मन घबराया है। कोई तो हो जो समझे दर्द मेरा, क्यों हर पल ये दिल भरमाया है।

Nazm — By Furkan S Khan

Kaafiya: गहरी, ठहरी, बहरी  |  Radeef: है
ये खामोशी भी कितनी गहरी है, हर आहट अब तो ठहरी है। आँखों में नमी है, लबों पर सन्नाटा, क्या मेरी दुनिया अब बहरी है?

Nazm — By Furkan S Khan

Kaafiya: मेरे, तारे, सहारे
टूट गए वो सारे ख्वाब मेरे, जो कभी थे आँखों के तारे। बिखरे पड़े हैं अब हर सू, कैसे समेटूँ ये टूटे सहारे?

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Zainab
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