ज़िन्दगी का सफ़र

Nazm — By Furkan S Khan

Kaafiya: राहें, आहें  |  Radeef: जाती हैं
ज़िन्दगी इक सफ़र है, चलती ही जाती हैं, कभी धूप, कभी छाँव, ये राहें बुलाती हैं। अनजानी सी मंज़िल, अनजाने से लम्हे, कुछ यादें हंसाती, कुछ आहें जगाती हैं। बस चलते रहना है, रुकना नहीं है कहीं।

Nazm — By Furkan S Khan

Kaafiya: पल, कल  |  Radeef: बीते हैं
हर लम्हा इक कहानी, जो अनकही सी है, गुज़रे हुए ये पल, जैसे कोई हल सी है। आज जो हसीन है, वो कल क्या होगा, हर आने वाला कल, इक नया फल सी है। पर आज में जीना है, यही तो जीने की रीत है।