गम की परछाई: दिल को छू लेने वाली उदासी पर नाज़्म | Furkan S Khan

Furkan S Khan की कलम से एक मार्मिक नाज़्म 'गम की परछाई', जो उदासी, अकेलेपन और दिल की बेकरारी को बयां करती है। गहन भावनाओं से भरी ये कविता।

Zainab Khatoon
Zainab Khatoon
संपादक
Friday, August 28, 2026
AMP 0 7
https://www.vews.in/hum-aur-zindagi/gam-ki-parchhai-heart-touching-nazm-on-sadness-furkan-s-khan
ह
हम और ज़िंदगी
NEWS CARD
Logo
गम की परछाई: दिल को छू लेने वाली उदासी पर नाज़्म | Furkan S Khan
“गम की परछाई: दिल को छू लेने वाली उदासी पर नाज़्म | Furkan S Khan”
Favicon
Vews
https://www.vews.in/hum-aur-zindagi/gam-ki-parchhai-heart-touching-nazm-on-sadness-furkan-s-khan
Date
28 August 2026
गम की परछाई: दिल को छू लेने वाली उदासी पर नाज़्म | Furkan S Khan
Nazm
ये गम की परछाई मुझको सताती है मेरी हर खुशी को मुझसे चुराती है अकेलेपन की आहटें दिल को रुलाती है ये रातें बेकरारी में कटती जाती है कोई उम्मीद अब नज़र नहीं आती है बस एक खामोशी हर तरफ छा जाती है।
Kaafiya सताती, चुराती, रुलाती, जाती, आती, छा जाती Radeef है
F Poetry ByFurkan S Khan
Nazm
ये टूटे ख्वाबों का लंबा सफर है न कोई मंज़िल, न कोई खबर है हर लम्हा उदासी का गहरा पहर है दिल पर हर बात का ज़हरीला असर है ये ज़िंदगी बस एक खाली घर है जहाँ सिर्फ खामोशी का मंज़र है।
Kaafiya सफर, खबर, पहर, असर, घर, मंज़र Radeef है
F Poetry ByFurkan S Khan
Nazm
ये कैसा अंधेरा है मेरे दिल में न कोई रौशनी, न कोई मंज़िल है हर राह पर खड़ी बस मुश्किल है न कोई किनारा, न कोई साहिल है खुशियों के काबिल न रहा ये दिल है गम के सिवा कुछ भी न हासिल है।
Kaafiya दिल, मंज़िल, मुश्किल, साहिल, काबिल, हासिल Radeef है
F Poetry ByFurkan S Khan

गम की परछाई

Nazm — By Furkan S Khan

Kaafiya: सताती, चुराती, रुलाती, जाती, आती, छा जाती  |  Radeef: है
ये गम की परछाई मुझको सताती है मेरी हर खुशी को मुझसे चुराती है अकेलेपन की आहटें दिल को रुलाती है ये रातें बेकरारी में कटती जाती है कोई उम्मीद अब नज़र नहीं आती है बस एक खामोशी हर तरफ छा जाती है।

Nazm — By Furkan S Khan

Kaafiya: सफर, खबर, पहर, असर, घर, मंज़र  |  Radeef: है
ये टूटे ख्वाबों का लंबा सफर है न कोई मंज़िल, न कोई खबर है हर लम्हा उदासी का गहरा पहर है दिल पर हर बात का ज़हरीला असर है ये ज़िंदगी बस एक खाली घर है जहाँ सिर्फ खामोशी का मंज़र है।

Nazm — By Furkan S Khan

Kaafiya: दिल, मंज़िल, मुश्किल, साहिल, काबिल, हासिल  |  Radeef: है
ये कैसा अंधेरा है मेरे दिल में न कोई रौशनी, न कोई मंज़िल है हर राह पर खड़ी बस मुश्किल है न कोई किनारा, न कोई साहिल है खुशियों के काबिल न रहा ये दिल है गम के सिवा कुछ भी न हासिल है।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Wow Wow 0
Sad Sad 0
Angry Angry 0
Zainab Khatoon
संपादक

A passionate content creator sharing meaningful baby names, Islamic names and their beautiful meanings, along with the latest news and informative stories. Bringing knowledge, culture, and updates together.

Comments (0)

User