इश्क का सफ़र
Nazm — By Furkan S Khan
Kaafiya: राहों, आहों | Radeef: में
मोहब्बत की राहों में, दिल खो गया है,
हर आहों में तेरी, तेरा नाम आ गया है।
ये कैसा जादू है, ये कैसी है बेखुदी,
तेरी यादों के साये में, हर पल जिया है।
न जाने कब हुआ ये, न कोई इल्म था,
बस तेरी चाहत में, ये दिल बह गया है।
Nazm — By Furkan S Khan
Kaafiya: अनकही, कही | Radeef: है
कुछ बातें अनकही, दिल में दबी है,
जो लबों तक आके, फिर रुक सी गयी है।
तेरी आँखों में जब, मैंने खुद को देखा,
मेरी दुनिया वहीं, सिमट सी गयी है।
ये कैसा रिश्ता है, ये कैसा है नाता,
हर धड़कन तेरी, धड़कन बन गयी है।