जीवन की डगर

Qita — By Furkan S Khan

Kaafiya: मोड़, जोड़, ओड़
जीवन एक डगर है, हर पल नया मोड़, कभी मिलती खुशी, कभी गम का जोड़। चलते रहना ही फ़ितरत है इसकी, हर अनुभव है अनमोल, हर साँस में ओड़।

Qita — By Furkan S Khan

Kaafiya: हार, अंधकार, संसार
ज़िंदगी है एक खेल, कभी जीत, कभी हार, कभी उजाला घना, कभी गहरा अंधकार। सब कुछ है यहाँ क्षणिक, न कुछ भी रहे स्थिर, बस प्यार की लौ जलाए रख, यही है संसार।

Qita — By Furkan S Khan

Kaafiya: नहीं, नहीं, नहीं
वक्त की धारा बहती जाए, रुकती नहीं, हर पल नया रंग दिखाए, झुकती नहीं। जो बीत गया, वो लौटा नहीं कभी, बस आज में जी ले, कल की फिक्र ही नहीं।