दिल के वीराने में अब भी चिराग़ जलता है,
तेरी यादों का सफ़र रोज़ यहाँ चलता है।

मैंने चाहा कि तुझे भूल ही जाऊँ लेकिन,
इश्क़ वो नाम है जो दिल पे सदा रहता है।

हर तरफ़ धूप ही धूप थी इस दुनिया में,
तेरी पलकों का वो साया ही क्यूँ छलता है?

हमने देखा था जिसे चाँद से भी आगे कहीं,
आज वो शख़्स किसी और का बन जाता है।

दिल को अब कोई शिकायत भी नहीं है लेकिन,
दर्द चुपके से निगाहों में ठहर जाता है।

— Furkan S Khan

तेरा नाम लबों पर सजा के रोते हैं,
हम हर रात चुपके से जला के रोते हैं।

जो दिल की धड़कन में बसा था बरसों से,
उसी को ग़ैरों का बना के रोते हैं।

ख़्वाब टूटा तो कुछ इस तरह बिखरे हम,
आईने को भी अब दिखा के रोते हैं।

तेरे वादों की कसमें अभी तक सांसों में,
हर बात पर ख़ुद को मना के रोते हैं।

इश्क़ की राहों में उजाले कम निकले,
इसलिए हर मोड़ पे दिया जला के रोते हैं।

— Furkan S Khan

किसी की याद में दिल को यूँ जलाया न करो,
रात भर चाँद से बातें तो बताया न करो।

जो मुक़द्दर में नहीं, उसको भुला दो यारो,
यूँ ही हर रोज़ उसे ख़ुद से बुलाया न करो।

ज़ख़्म देने की सज़ा मिल ही गई है मुझको,
अब मेरी हालत-ए-दिल पर मुस्कुराया न करो।

तुम भी खो जाओगे इस दर्द की गहराई में,
बेवजह अश्क़ मेरे साथ बहाया न करो।

चलो अब छोड़ भी दो, ख़्वाब अधूरे अपने,
हर घड़ी टूटे दिलों को आज़माया न करो।

— Furkan S Khan