मुख्य बातें
- घबराहट में LPG की बुकिंग ने सप्लाई सिस्टम को बुरी तरह प्रभावित किया है।
- पेट्रोल पंपों और बाजारों में कालाबाज़ारी के चलते सिलेंडर की कीमतें बेतहाशा बढ़ गई हैं।
- आम उपभोक्ता को सिलेंडर के लिए भारी कीमत चुकानी पड़ रही है, जिससे परेशानी बढ़ गई है।
घबराहट में बुकिंग से बिगड़ी LPG की चाल
एक तरफ जहां गैस कंपनियां दावा कर रही हैं कि सप्लाई में कोई कमी नहीं है, वहीं दूसरी तरफ आम आदमी को सिलेंडर के लिए हफ्तों का इंतज़ार करना पड़ रहा है। यह स्थिति तब है जब देश के कई हिस्सों में त्योहारी सीजन दस्तक दे रहा है और रसोई गैस की मांग स्वाभाविक रूप से बढ़ जाती है।
लोगों में अचानक बढ़ी इस घबराहट के पीछे कई कारण माने जा रहे हैं। कुछ लोगों का कहना है कि उन्हें डर है कि कहीं पेट्रोल-डीजल की तरह LPG की कीमतों में भी बड़ा उछाल न आ जाए। इसी डर के चलते वे ज़रूरत से ज़्यादा सिलेंडर बुक करा रहे हैं।
सप्लाई चेन पर पड़ा भारी दबाव
इस 'पैनिक बुकिंग' का सीधा असर LPG डिस्ट्रीब्यूटर्स और सप्लाई चेन पर पड़ा है। जो कंपनियां पहले समय पर सिलेंडर पहुंचा रही थीं, अब वे भी मांग पूरी करने में हांफ रही हैं। ऐसे में, जहाँ ज़रूरत है, वहाँ सिलेंडर नहीं पहुँच पा रहा।
इस गड़बड़ी का फायदा सीधा कालाबाज़ारों को मिल रहा है। छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में, जहां लोग ऑनलाइन बुकिंग से ज़्यादा परिचित नहीं हैं, वहां स्थिति और भी गंभीर है। लोग ज़्यादा पैसे देकर भी सिलेंडर खरीदने को मजबूर हैं।
ब्लैक मार्केट में बेकाबू कीमतें
दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों में भी LPG की कीमतें आसमान छू रही हैं। जहाँ एक सामान्य 14.2 किलोग्राम के सिलेंडर की तय कीमत एक निश्चित सीमा में होती है, वहीं काला बाज़ार में यही सिलेंडर निर्धारित मूल्य से कहीं ज़्यादा महंगा बिक रहा है। कुछ जगहों पर तो कीमतों में 200 से 300 रुपये तक की बढ़ोतरी देखी जा रही है।
पेट्रोल पंपों के बाहर लंबी कतारें और डीलरों के पास लगी भीड़ इस बात का सबूत है कि हालात कितने बिगड़ चुके हैं। कई डीलर ग्राहकों को यह कहकर लौटा रहे हैं कि स्टॉक खत्म है, जबकि असली वजह मांग और आपूर्ति का संतुलन बिगड़ना है।
आम उपभोक्ता की मुश्किल बढ़ी
आम आदमी के लिए यह एक दोहरी मार है। एक तरफ तो सिलेंडर की उपलब्धता नहीं है, वहीं दूसरी तरफ अगर किसी तरह मिल भी रहा है, तो जेब पर भारी पड़ रहा है। खासकर छोटे व्यापारी और निम्न-आय वर्ग के लोग सबसे ज़्यादा प्रभावित हो रहे हैं।
सरकार और तेल कंपनियों से उम्मीद है कि वे इस समस्या का जल्द से जल्द समाधान निकालेंगे, ताकि आम लोगों को राहत मिल सके। देश में इस तरह की स्थिति, खासकर त्योहारों के समय, चिंताजनक है।
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