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आत्मा का स्पंदन: आध्यात्मिक नज़्म

Furkan S Khan द्वारा लिखी गई 'आत्मा का स्पंदन' नामक एक मार्मिक आध्यात्मिक नज़्म, जो जीवन के गहरे रहस्यों और आत्मा की खोज पर प्रकाश डालती है।

Monday, September 21, 2026
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आत्मा का स्पंदन: आध्यात्मिक नज़्म
“आत्मा का स्पंदन: आध्यात्मिक नज़्म”
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21 September 2026
आत्मा का स्पंदन: आध्यात्मिक नज़्म
नज़्म
मन की गहराइयों में, इक शोर सा उठा है, अनंत से जुड़ा है, जो खुद को पहचाना है ये रूह का सफ़र है, जहाँ हर पल नया है, हर सांस में खुदा है, ये कैसा फ़साना है जो खो गया था कब का, वो आज मिल गया है, हर रूप में वही है, जो सबको समाना है
Kaafiya जाना, आना, पाना Radeef है
F Poetry ByFurkan S Khan
शायरी
हर साँस में बसी है, वो अनजानी सी हवा, जो जोड़ती है सबको, कोई जुदा नहीं हर प्रार्थना में गूंजे, इक अनकही सी दुआ, जो मिटा दे दूरियाँ, ऐसा गिला नहीं ये ज़िक्र-ए-ज़िंदगी है, जो हर कहीं है, अदृश्य धागा है ये, जो खोता कहीं नहीं
Kaafiya हवा, दुआ, जुदा Radeef नहीं
F Poetry ByFurkan S Khan

स्पंदन: धड़कन, कंपन। अनंत: जिसका कोई अंत न हो। रूह: आत्मा। खुदा: ईश्वर। फ़साना: कहानी, किस्सा। समाना: समाहित होना, मिल जाना।

अनजानी: अपरिचित। दुआ: प्रार्थना। गिला: शिकायत। ज़िक्र-ए-ज़िंदगी: जीवन का वर्णन/चर्चा। अदृश्य: जो दिखाई न दे।

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Mahira Noor
संपादक

A passionate poet who weaves emotions into beautiful words. Writing about love, heartbreak, dreams, and life, one verse at a time.

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