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खुशी का वो गुमाँ: एक उदास शायरी

Furkan S Khan की लिखी यह दिल को छू लेने वाली हिन्दी शायरी उस खोई हुई खुशी और बीते पलों की यादों को बयां करती है।"

Thursday, September 24, 2026
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खुशी का वो गुमाँ: एक उदास शायरी
“खुशी का वो गुमाँ: एक उदास शायरी”
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24 September 2026
खुशी का वो गुमाँ: एक उदास शायरी
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वो पल जो खुशी का गुज़रा, अब बस एक ख़्वाब सा था, सब कुछ हसीन लगता था, हर लम्हा लाजवाब सा था दिल में जो छा गया था, वो अजब सा समां था, ज़माने की परवाह कहाँ, बस तू ही मेरा जहाँ था आज भी याद आता है, वो बेफिक्री का गुमाँ था, लफ्ज़ों में कैसे समेटूँ, जो ज़िक्र उसका बयाँ था
Kaafiya समां, जहाँ, गुमाँ, बयाँ Radeef था
F Poetry ByFurkan S Khan

यह शायरी उस बीते हुए सुखद पल को याद करती है जब जीवन में खुशियाँ भरी थीं और सब कुछ बहुत खूबसूरत लगता था। यह उस समय की बेफिक्री और आनंद को दर्शाती है, जिसे शब्दों में पूरी तरह व्यक्त करना मुश्किल है।

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Mahira Noor
संपादक

A passionate poet who weaves emotions into beautiful words. Writing about love, heartbreak, dreams, and life, one verse at a time.

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