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सनमख़रामी शायरी: बेवफ़ाई के बाद ख़ुशी के आँसू

Furkan S Khan की सनमख़रामी शायरी का एक अनूठा नज़्म, जहाँ बेवफ़ाई के बाद भी मिलती है आज़ादी की ख़ुशी। दर्द में छुपी मुस्कान का अहसास।

Thursday, September 24, 2026
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सनमख़रामी शायरी: बेवफ़ाई के बाद ख़ुशी के आँसू
“सनमख़रामी शायरी: बेवफ़ाई के बाद ख़ुशी के आँसू”
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24 September 2026
सनमख़रामी शायरी: बेवफ़ाई के बाद ख़ुशी के आँसू
सनमख़रामी शायरी
जब भी तेरी यादों के बादल छाए, मेरे होंठों पर एक झूठी मुस्कान ले आए माना कि तू बेवफ़ा निकला, दिल तोड़ गया, पर तेरे जाने से ही जीवन मेरा सँवराए ये आँसू जो हैं, ये जुदाई के नहीं, ये तो आज़ादी के हैं, जो ख़ुशी से आए
Kaafiya जगमगाए, सँवराए Radeef आए
F Poetry ByFurkan S Khan

यह 'सनमख़रामी शायरी' का एक अनूठा रूप है, जहाँ धोखे के बाद भी एक अजीब सी ख़ुशी महसूस होती है। बेवफ़ाई के दर्द को भूलकर, आज़ादी के नए अहसास को 'ख़ुशी के आँसू' के रूप में व्यक्त किया गया है। कवि ने 'जगमगाए' और 'सँवराए' जैसे शब्दों का प्रयोग करके इस विरोधाभासी भावना को खूबसूरती से दर्शाया है, जहाँ बिछड़ने का ग़म नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत का उल्लास है।

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Mahira Noor
संपादक

A passionate poet who weaves emotions into beautiful words. Writing about love, heartbreak, dreams, and life, one verse at a time.

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