इश्क़ की रौशनी: दिल को छू लेने वाली नाज़्म | Furkan S Khan
फ़ुरकान एस ख़ान की कलम से, इश्क़ की रौशनी पर एक बेहद खूबसूरत नाज़्म। प्रेम की गहराई, रूह का सुकून और चाहत का इकरार दर्शाती ये कविता।
गहराइयों: गहराई, भीतरी भाग महकती: खुशबूदार, सुगंधित नशा: मदहोशी, जुनून जहाँ: दुनिया, संसार फीका: बेजान, नीरस रूह: आत्मा, प्राण सुकून: शांति, चैन दीदार: दर्शन, झलक उपचार: इलाज, समाधान इकरार: स्वीकार, कबूलनामा
अनकही दास्ताँ: न कही गई कहानी सफ़र: यात्रा, यात्रा मार्ग एहसास: अनुभव, अनुभूति रूह: आत्मा, प्राण गूँज: प्रतिध्वनि, आवाज़ हर लेती: दूर कर देती है साये: परछाईं, छाया इबादत: पूजा, आराधना
सूना मकां: खाली घर बेज़ुबां: खामोश, चुप बहार: वसंत ऋतु, रौनक इंतज़ार: प्रतीक्षा, राह देखना सहारा: आश्रय, समर्थन बंधन: रिश्ता, जुड़ाव घड़ी: पल, क्षण
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