मोहब्बत में ईर्ष्या की आग - Furkan S Khan की दिल छूने वाली शायरी

जब मोहब्बत में ईर्ष्या की आग लगती है, दिल कैसे जलता है, इस दर्द भरी शायरी में बयां किया गया है। Furkan S Khan की यह रचना भावनाओं का सागर है।

Saturday, September 19, 2026
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मोहब्बत में ईर्ष्या की आग - Furkan S Khan की दिल छूने वाली शायरी
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19 September 2026
मोहब्बत में ईर्ष्या की आग - Furkan S Khan की दिल छूने वाली शायरी
Mohabbat Shayari — By Furkan S Khan
जब कोई और तेरे लबों को चूमे, मेरा दिल जलता है, ये कैसा गुनाह है। तेरी हँसी की गूँज जब औरों में सुनूँ, मेरी दुनिया सूनी, हर पल तन्हा है। नज़रें तेरी जब उस पर टिक जाती हैं, मेरी साँसों पर जैसे कोई पहरा है। ख़्वाबों में भी तेरी मौजूदगी से जलूँ, ये कैसी मोहब्बत, क्या ये वफ़ा है? क्यूँ बेगाना सा लगता है मुझको ये जहाँ, जब तू किसी और के संग खड़ा है। मेरे अरमानों की हर राह पर काँटे, ये ईर्ष्या की आग, क्यूँ बुझती नहीं है। लफ़्ज़ों में बयां करूँ तो कैसा लगे, दिल का हाल मेरा, जो बहुत गहरा है। बस इतना ही कहूँगा, ऐ मेरे हमदम, तेरा यूँ बदलना, मुझे बहुत सहमा है।

लबों (Labon): होंठ, गुनाह (Gunaah): पाप, तन्हा (Tanha): अकेला, पहरा (Pehra): निगरानी, बेगाना (Begana): पराया, अरमानों (Armanon): इच्छाएँ, हमदम (Hamdam): साथी, सहमा (Sehma): भयभीत

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Mahira Noor
संपादक

A passionate poet who weaves emotions into beautiful words. Writing about love, heartbreak, dreams, and life, one verse at a time.

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