मौत पर रोमांटिक शायरी: अमर इश्क़ की आख़िरी मंज़िल | Furkan S Khan
Furkan S Khan की दिल छू लेने वाली रोमांटिक शायरी 'इश्क़ की अमर रस्म' में मौत और अमर प्यार के गहरे रिश्ते को महसूस करें।
डोर थमेगी: साँसों का अंत, जीवन का समाप्त होना मूँद जाएँगी: बंद हो जाएँगी दुनिया से परे: इस दुनिया की सीमाओं से बाहर, अलौकिक वजूद: अस्तित्व, पहचान पनाह लेती है: शरण लेती है, आश्रय पाती है गरचे: यद्यपि, भले ही रूह: आत्मा
फ़ानी: नश्वर, नाशवान, क्षणभंगुर मुसाफ़िर: यात्री, राहगीर लौ: ज्योति, आग की लपट मंज़र: दृश्य, नज़ारा रूह: आत्मा एहसास: अनुभव, भावना ज़ुबाँ: ज़बान, जीभ
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