मौत पर रोमांटिक शायरी: अमर इश्क़ की आख़िरी मंज़िल | Furkan S Khan

Furkan S Khan की दिल छू लेने वाली रोमांटिक शायरी 'इश्क़ की अमर रस्म' में मौत और अमर प्यार के गहरे रिश्ते को महसूस करें।

Saturday, September 19, 2026
AMP 0 2
हम और ज़िंदगी
NEWS CARD
Logo
मौत पर रोमांटिक शायरी: अमर इश्क़ की आख़िरी मंज़िल | Furkan S Khan
“मौत पर रोमांटिक शायरी: अमर इश्क़ की आख़िरी मंज़िल | Furkan S Khan”
Favicon
Vews
https://www.vews.in/s/RGzL2Z
Date
19 September 2026
मौत पर रोमांटिक शायरी: अमर इश्क़ की आख़िरी मंज़िल | Furkan S Khan
Romantic Shayari — By Furkan S Khan
जब साँसों की डोर थमेगी, और आँखें मूँद जाएँगी, क्या तब भी तेरी यादें, मेरी रूह को छू जाएँगी? ये इश्क़ जो दुनिया से परे था, क्या मौत उसे मिटा पाएगी? या हर साँस के आख़िरी पल तक, बस तेरी चाहत ही रहेगी? सुना है मौत एक सफ़र है, जहाँ सब तन्हा चलते हैं, पर मेरी रूह तो तेरी है, क्या वो भी अकेली जाएगी? काश ये मौत भी आए, तेरी बाहों में लिपट कर, कि तेरी खुशबू में घुल कर, मेरा वजूद भी मिट जाए। ये जुदाई सिर्फ जिस्मों की होगी, रूहें कहाँ बिछड़ती हैं, तू मेरे दिल में धड़कता है, तू ही मेरी हर साँस में है। इस आख़िरी सफ़र पर भी, मेरा हाथ थामे रखना, कि तेरी चाहत में ही तो, मेरी हर साँस पनाह लेती है। मौत गरचे जुदा कर दे, पर इश्क़ अमर रहेगा, हर जन्म में तेरी ही मैं, हर पल तेरा ही रहूँगा।
Romantic Shayari — By Furkan S Khan
ये मत सोचना कि मौत आएगी तो सब कुछ मिट जाएगा, तेरी यादों का साया, मेरी रूह में बस जाएगा। हर साँस में तेरी धड़कन, हर पल तेरी ही खुशबू, क्या ये मौत भी, इस एहसास को छीन पाएगा? जिस्म भले ही राख हो जाए, हवाओं में बिखर जाए, पर इश्क़ की लौ जो जली है, वो कभी बुझ न पाएगा। तेरी तस्वीर आँखों में है, तेरा नाम ज़ुबाँ पर है, ये दिल तेरे सिवा किसी और का कैसे हो पाएगा? ये दुनिया भी फ़ानी है, ये ज़िंदगी भी मुसाफ़िर, बस एक तेरी मोहब्बत है, जो अमर हो जाएगा। जब मेरी आँखें बंद होंगी, तो तेरा ही चेहरा दिखेगा, क्या मौत भी, इस मंज़र को मुझसे जुदा कर पाएगा? तू पास हो या दूर कहीं, तू हमेशा मेरा रहेगा, मेरी हर धड़कन में तेरा नाम, हर साँस में तू ही रहेगा।

डोर थमेगी: साँसों का अंत, जीवन का समाप्त होना मूँद जाएँगी: बंद हो जाएँगी दुनिया से परे: इस दुनिया की सीमाओं से बाहर, अलौकिक वजूद: अस्तित्व, पहचान पनाह लेती है: शरण लेती है, आश्रय पाती है गरचे: यद्यपि, भले ही रूह: आत्मा

फ़ानी: नश्वर, नाशवान, क्षणभंगुर मुसाफ़िर: यात्री, राहगीर लौ: ज्योति, आग की लपट मंज़र: दृश्य, नज़ारा रूह: आत्मा एहसास: अनुभव, भावना ज़ुबाँ: ज़बान, जीभ

Follow us:

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Wow Wow 0
Sad Sad 0
Angry Angry 0
Mahira Noor
संपादक

A passionate poet who weaves emotions into beautiful words. Writing about love, heartbreak, dreams, and life, one verse at a time.

Comments (0)

User