प्रेरणादायक शायरी: अपनी मंज़िलें खुद बना जा | Furkan S Khan

Furkan S Khan की लिखी यह प्रेरणादायक शायरी आपको जीवन की मुश्किलों से लड़ने और अपनी मंज़िलें खुद बनाने का हौसला देगी।

Friday, September 18, 2026
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18 September 2026
प्रेरणादायक शायरी: अपनी मंज़िलें खुद बना जा | Furkan S Khan
Shayari — By Furkan S Khan
मंज़िलें राहों में खुद ही बना जा हर मुश्किल से तू लड़ता चला जा किस्मत को कोसेगा तो कुछ न मिलेगा अपने कर्मों से इतिहास लिख जा
Shayari — By Furkan S Khan
जो देखे थे सपने, उनको हकीकत बना जा तेरी मेहनत ही तेरी सच्ची दवा जा गिर पड़ना तो कुदरत है, फिर उठ खड़ा हो तेरे हौसले की दुनिया देखे गवाह जा
Shayari — By Furkan S Khan
हर रात के बाद आता है एक नया सवेरा दूर कर तू अपने मन का सारा अंधेरा हर पल में छिपी है एक नई उम्मीद जी ले हर लम्हा, आगे बढ़ता जा

मंज़िलें: लक्ष्य, उद्देश्य। राहों: रास्तों। कर्मों: कार्यों, किए हुए काम।

हकीकत: सच्चाई, वास्तविकता। दवा: इलाज। हौसले: हिम्मत, साहस। गवाह: साक्षी।

सवेरा: सुबह। अंधेरा: रात, उदासी। उम्मीद: आशा। लम्हा: पल।

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Zainab
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