प्रेम का सार: फ़ुरकान एस ख़ान की रूहानी क़िता

फ़ुरकान एस ख़ान की यह सुंदर क़िता 'प्रेम का सार' जीवन में प्रेम के महत्व और उसकी रूहानी गहराई को बयां करती है। इश्क़ की सच्ची परिभाषा जानें।

Sunday, September 13, 2026
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प्रेम का सार: फ़ुरकान एस ख़ान की रूहानी क़िता
“प्रेम का सार: फ़ुरकान एस ख़ान की रूहानी क़िता”
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Date
13 September 2026
Qita — By Furkan S Khan
जो प्रेम है, वो जीवन का आधार है, हर साँस में, हर धड़कन में, उसका ही विस्तार है। ये रूह का रिश्ता है, कोई दुनियावी व्यापार नहीं, इश्क़ वो दरिया है, जिसका कोई किनारा नहीं।
Qita — By Furkan S Khan
जो बंधे हैं प्रेम की डोर से, वो नहीं डरते किसी शोर से। ये रिश्ता रूह का है, जिस्म का नहीं, मिलते हैं दिल यहाँ, हर भोर से।

आधार: बुनियाद, नींव (Foundation) विस्तार: फैलाव (Expansion) रूह: आत्मा (Soul) दुनियावी: सांसारिक (Worldly) व्यापार: लेन-देन, सौदा (Trade, deal) दरिया: नदी (River)

डोर: धागा, बंधन (Thread, bond) शोर: आवाज़, कोलाहल (Noise) रूह: आत्मा (Soul) जिस्म: शरीर (Body) भोर: सुबह, प्रभात (Dawn, morning)

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Zainab
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