ग़म की मुस्कान: उदासी पर फ़ुरकान एस खान की ग़ज़ल

फ़ुरकान एस खान की यह ग़ज़ल दिल के गहरे ग़म, छुपी हुई उदासी और लबों पर झूठी मुस्कान के दर्द को बयाँ करती है। तन्हाई और दिल की बेचैनी का सुंदर चित्रण।

Tuesday, September 8, 2026
AMP 0 0
हम और ज़िंदगी
NEWS CARD
Logo
ग़म की मुस्कान: उदासी पर फ़ुरकान एस खान की ग़ज़ल
“ग़म की मुस्कान: उदासी पर फ़ुरकान एस खान की ग़ज़ल”
Favicon
Vews
https://www.vews.in/hum-aur-zindagi/smile-of-sorrow-ghazal-on-sadness-by-furkan-s-khan
Date
08 September 2026
Ghazal — By Furkan S Khan
दिल में है ग़म, लबों पे मुस्कान क्यों है? इस वीराने में भी, दिल परेशान क्यों है? हर पल ये आँखें भीगी रहती हैं, फिर भी ये दुनिया मुझसे अंजान क्यों है?
Ghazal — By Furkan S Khan
ज़िंदगी की हर राह पर तन्हाई मिली, मेरी किस्मत इतनी बेजान क्यों है? ख़ामोशी चीख़ती है अंदर ही अंदर, बाहर ये शोर-ओ-गुल का सामान क्यों है?
Ghazal — By Furkan S Khan
दर्द की शिद्दत ने ज़ख्म गहरे किए, फिर भी हर साँस में ये अरमान क्यों है? ये कैसी आग है जो बुझती नहीं, इस दिल में जलता ये शमशान क्यों है?

वीराने: सुनसान जगह, अकेलापन। अंजान: अपरिचित, जिसे पता न हो।

बेजान: निर्जीव, जिसमें जान न हो। शोर-ओ-गुल: अत्यधिक शोर, हंगामा।

शिद्दत: तीव्रता, प्रबलता। अरमान: इच्छा, अभिलाषा। शमशान: (यहाँ) जलती हुई पीड़ा, अंतहीन दुख।

Follow us:

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Wow Wow 0
Sad Sad 0
Angry Angry 0
Zainab
लेखक

The world’s news & beautiful Shayari, brought to you by AI. Powered by vews.in.

Comments (0)

User