उदासी का मंज़र: फ़ुरक़ान एस ख़ान की मार्मिक नाज़्म

फ़ुरक़ान एस ख़ान की यह नाज़्म उदासी के गहरे एहसास और ज़िंदगी की बंज़रता को बयां करती है। हृदयस्पर्शी शब्द जो आपके दिल को छू लेंगे।

Sunday, August 30, 2026
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उदासी का मंज़र: फ़ुरक़ान एस ख़ान की मार्मिक नाज़्म
“उदासी का मंज़र: फ़ुरक़ान एस ख़ान की मार्मिक नाज़्म”
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Date
30 August 2026
Nazm — By Furkan S Khan
उदासी का एक मंज़र है जो हर पल मेरे अंदर है ज़िंदगी हुई अब बंज़र है बस ख़ामोशी का समंदर है
Nazm — By Furkan S Khan
हर लम्हा एक खामोशी का बोझ है जो सहना अब मुश्किल रोज़ है दिल में दबी हर अधूरी बात है अंधेरी तन्हाई की रात है
Nazm — By Furkan S Khan
यह दिल अब एक वीराना सा है हर खुशी से बेगाना सा है कोई पुराना अफ़साना सा है जो भूला हुआ तराना सा है

मंज़र: दृश्य, नज़ारा बंज़र: अनुपजाऊ, खाली समंदर: सागर

लम्हा: पल खामोशी: चुप्पी अधूरी: अपूर्ण, अधूरी तन्हाई: अकेलापन

वीराना: उजाड़ जगह, सुनसान बेगाना: अनजान, पराया अफ़साना: कहानी, किस्सा तराना: गीत, धुन

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Zainab
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