ईरान की राजधानी तेहरान में हाल ही में एक विशाल प्रदर्शन देखा गया। यह गाजा में इजराइल-हमास संघर्ष की शुरुआत के बाद से आयोजित अब तक की सबसे बड़ी रैलियों में से एक थी। हजारों की संख्या में लोग सड़कों पर उतरे। उन्होंने गाजा पट्टी में जारी घटनाओं के खिलाफ अपना गुस्सा और फिलिस्तीन के प्रति समर्थन व्यक्त किया।
शहर के केंद्रीय चौक, आज़ादी स्क्वायर, पर प्रदर्शनकारियों का हुजूम उमड़ पड़ा। विभिन्न वर्गों के लोग इसमें शामिल हुए। उनके हाथों में फिलिस्तीनी झंडे, धार्मिक प्रतीक और ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के पोस्टर थे। उन्होंने इजराइल और अमेरिका विरोधी नारे लगाए, साथ ही क्षेत्रीय प्रतिरोध के आह्वान भी किए। यह जनसैलाब ईरान की क्षेत्रीय नीति और फिलिस्तीनी मुद्दे पर उसके दृढ़ रुख को दर्शाता है।
नारे और संदेश: क्या थी भावना?
इस रैली में लगे नारों में 'इजराइल मुर्दाबाद', 'अमेरिका मुर्दाबाद' जैसे प्रमुख वाक्यांश शामिल थे। प्रदर्शनकारियों ने गाजा में इजरायली सैन्य अभियानों की निंदा की। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की। रैली का माहौल जोशपूर्ण था, जिसमें एकजुटता और दृढ़ संकल्प की भावना स्पष्ट दिख रही थी।
ईरान के कई वरिष्ठ अधिकारियों ने भी रैली को संबोधित किया। उन्होंने फिलिस्तीनियों के 'प्रतिरोध' को अपना समर्थन दोहराया। अधिकारियों ने यह भी कहा कि गाजा में इजरायली कार्रवाई से क्षेत्रीय स्थिरता को खतरा है। यह प्रदर्शन ईरान की विदेश नीति का एक सीधा प्रतिबिंब था, जो फिलिस्तीनी मुद्दे को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक मानता है।
Did You Know? ईरान में हर साल रमजान के आखिरी शुक्रवार को 'कुद्स दिवस' मनाया जाता है। यह फिलिस्तीनियों के साथ एकजुटता और यरूशलेम पर इजरायली कब्जे के विरोध का प्रतीक है।
क्षेत्रीय भू-राजनीति पर असर
तेहरान में आयोजित इस विशाल रैली के क्षेत्रीय भू-राजनीति पर महत्वपूर्ण निहितार्थ हैं। यह मध्य पूर्व में चल रहे तनाव को और बढ़ा सकता है। ईरान लंबे समय से गाजा में हमास और लेबनान में हिजबुल्लाह जैसे समूहों का समर्थन करता रहा है। यह रैली उसके इन गठबंधनों और क्षेत्रीय शक्ति को दर्शाती है।
अमेरिका और इजराइल के साथ ईरान के संबंध दशकों से तनावपूर्ण रहे हैं। इस तरह के प्रदर्शन इन संबंधों में और कड़वाहट घोलते हैं। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यह रैली ईरान की आंतरिक राजनीतिक एकजुटता को भी मजबूत करती है। यह ईरान के लोगों के बीच फिलिस्तीनी मुद्दे पर आम सहमति का संदेश देती है।
ईरान की दृढ़ स्थिति
ईरान ने गाजा संघर्ष के बाद से इजराइल और उसके सहयोगी देशों पर लगातार कूटनीतिक और बयानबाजी का दबाव बनाया है। यह रैली इसी नीति का एक हिस्सा है। ईरान का मानना है कि फिलिस्तीनी राष्ट्र के अधिकारों का सम्मान होना चाहिए। वह इस क्षेत्र में अमेरिकी प्रभाव को कम करने का भी प्रबल समर्थक रहा है।
इस प्रदर्शन ने एक बार फिर दुनिया को ईरान की दृढ़ स्थिति से अवगत कराया है। वैश्विक मंच पर ईरान की आवाज मजबूत हुई है। मध्य पूर्व की बदलती गतिशीलता में तेहरान की यह रैली एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है।
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