आगरा – उत्तर प्रदेश के आगरा में स्थित 17वीं सदी की ऐतिहासिक मुगल हवेली 'मुबारक मंजिल' का एक बड़ा हिस्सा ध्वस्त कर दिया गया है। इसे औरंगजेब की हवेली के रूप में भी जाना जाता था। यह विध्वंस तब हुआ जब राज्य पुरातत्व विभाग ने तीन महीने पहले ही इस स्मारक को संरक्षित करने के लिए अधिसूचना जारी की थी। स्थानीय लोगों के अनुसार, 100 से अधिक ट्रैक्टर मलबे को साइट से हटाया गया, जिससे विध्वंस की व्यापकता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

ऐतिहासिक धरोहर पर चला बुलडोजर

मुबारक मंजिल का इतिहास मुगल काल से जुड़ा है और यह मुगल सम्राट औरंगजेब के शासनकाल के दौरान बनी थी। इस हवेली में शाहजहां, शुजा और औरंगजेब जैसे प्रमुख मुगल शासकों का निवास हुआ करता था। ब्रिटिश शासन के दौरान इस संरचना को मॉडिफाई कर कस्टम हाउस और साल्ट ऑफिस के रूप में इस्तेमाल किया गया। 1902 तक इसे 'तारा निवास' के नाम से जाना जाता था।

अखिलेश यादव का तीखा हमला

इस घटना को लेकर उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर सरकार और पुरातत्व विभाग को आड़े हाथों लिया। उन्होंने ट्विटर/X पर लिखा –
"भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण विभाग जागे नहीं तो चलानेवाले उनके प्रतिष्ठा पर भी बुलडोज़र चला देंगे।"

जनता में आक्रोश, सरकार से जवाब तलब

इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर जनता का आक्रोश देखने को मिला। लोग सरकार और पुरातत्व विभाग की निष्क्रियता पर सवाल उठा रहे हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि बिल्डर और अधिकारियों की मिलीभगत से इस ऐतिहासिक धरोहर को तोड़ा गया है।

धरोहरों की सुरक्षा पर सवाल

यह घटना देश की ऐतिहासिक विरासतों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करती है। आगरा, जो ताजमहल जैसी विश्व धरोहर के लिए प्रसिद्ध है, वहां एक और मुगल कालीन इमारत का यूं गायब हो जाना चिंता का विषय है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द ही सख्त कदम नहीं उठाए गए तो और भी ऐतिहासिक इमारतें लापरवाही की भेंट चढ़ सकती हैं।


आगरा में मुबारक मंजिल का विध्वंस ऐतिहासिक धरोहरों की उपेक्षा और प्रशासन की लापरवाही का एक और उदाहरण है। अखिलेश यादव जैसे नेताओं द्वारा उठाए गए सवालों के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार और पुरातत्व विभाग इस पर क्या कार्रवाई करते हैं।