सालार मसूद ग़ाज़ी के नाम से लगने वाला जेठ मेला और बहराइच का हक़
सैयद सालार मसूद ग़ाज़ी र. अ. के नाम से लगने वाला बहराइच का ऐतिहासिक जेठ मेला और उसका स्थानीय मिडिल क्लास के जीवन पर प्रभाव।
बहराइच की सरज़मीन पर हर साल जेठ महीने में जो मेला सैयद सालार मसूद ग़ाज़ी र. अ. के नाम से लगता है, वह सिर्फ एक मज़हबी ताज़गी नहीं, बल्कि वहाँ के मिडिल क्लास तबके का आर्थिक सहारा भी है। जब मुल्क की बड़ी सड़कों से बहराइच की गलियाँ गुलज़ार होती हैं, तब वहाँ के छोटे कारोबारी, दस्तकार, फेरीवाले और होटल वाले पूरे साल की रोज़ी एक महीने में बटोरते हैं।
यह मेला उनके लिए एक तिजारती तौहफा है, जो बड़े शहरों के साये में जीते हैं — लखनऊ, दिल्ली, मुंबई या सऊदी अरब के मेहनतकश मजदूर जो बहराइच का नाम अपने पसीने से ज़िंदा रखते हैं। जिले में न कोई बड़ी इंडस्ट्री है, न कोई सरकारी यूनिवर्सिटी, और न ही रोज़गार के पुख़्ता ज़रिये। ऐसे में यह मेला एक सालाना अमानत है, जिससे लोगों के चूल्हे जलते हैं।