हर एक लम्हा है दिल में सवाल सा,
तेरा ख़याल है ज्यों कोई ख़याल सा।
मुसाफ़िर-ए-दिल को राहें न मिल सकीं,
तेरी तरफ़ है खिंचाव का जाल सा।
हवा के संग चला हूँ तेरे निशाँ ढूँढता,
लगे है रस्ता भी तेरा ख्याल सा।
निगाह में जो ठहरती है तेरी सूरत,
वो चाँदनी है या कोई गुलाल सा।
तेरे बिना है अँधेरों में डूबता दिल,
तेरे साथ रोशन हर इक जमाल सा।