यह 'सनमख़रामी शायरी' का एक अनूठा रूप है, जहाँ धोखे के बाद भी एक अजीब सी ख़ुशी महसूस होती है। बेवफ़ाई के दर्द को भूलकर, आज़ादी के नए अहसास को 'ख़ुशी के आँसू' के रूप में व्यक्त किया गया है। कवि ने 'जगमगाए' और 'सँवराए' जैसे शब्दों का प्रयोग करके इस विरोधाभासी भावना को खूबसूरती से दर्शाया है, जहाँ बिछड़ने का ग़म नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत का उल्लास है।