हिम्मत न हार
Nazm — By Furkan S Khan
Kaafiya: हार, पार, निखार, बहार | Radeef: बार
जब गिरे तो उठना सीख ले हर बार,
हर चोट से कुछ पाना सीख ले हर बार।
मुश्किलों से घबराना नहीं है यार,
जीत का परचम लहराना सीख ले हर बार।
यह जीवन एक इम्तिहान है तेरा,
हर पल नया एक ऐलान है तेरा।
डर को दिल से निकालना सीख ले यार,
खुद पे भरोसा जगाना सीख ले हर बार।
तेरी राह में कांटे बिछे हैं अगर,
पर उनमें भी फूल छिपे हैं मगर।
कांटों से राह बनाना सीख ले यार,
हर दर्द को मुस्कुराना सीख ले हर बार।
सूरज की तरह चमकना है तुझे,
अंधेरों को दूर हटाना है तुझे।
अपनी मंज़िल को पाना सीख ले यार,
हर सपने को हकीकत बनाना सीख ले हर बार।
Nazm — By Furkan S Khan
Kaafiya: चाह, राह, निगाह, पनाह | Radeef: नहीं
सफ़र है कठिन, पर रुकना नहीं,
मंज़िल की चाह, वो झुकना नहीं।
हर कदम पे इम्तिहान है नया,
नज़र में लक्ष्य, वो चुभना नहीं।
जो डर गया, वो कभी जीतता नहीं,
जो गिर गया, वो फिर उठता नहीं।
उम्मीद की लौ बुझने देना नहीं,
अंधेरा कभी ठहरता नहीं।
हवाओं के रुख से तू डरना नहीं,
तूफानों से कभी घबराना नहीं।
तेरी हिम्मत ही तेरी पहचान है,
इसे कमज़ोर कभी करना नहीं।
नज़रें उठा, देख आसमाँ को तू,
ख़ुद में जगा ले तू तूफ़ाँ को तू।
जीत तेरी ही है, बस चलता जा तू,
कोई रोक पाएगा अब तुझे नहीं।
Nazm — By Furkan S Khan
Kaafiya: बाहर, शमा, दुनिया, पूंजी | Radeef: है
क्यों ढूँढता है तू रौशनी बाहर,
तेरे भीतर ही तो इक दुनिया है।
बुझा दे हर डर को, जला दे तू शमा,
तेरी हिम्मत ही तेरी पूंजी है।
सपनों को दे दे तू परवाज़ नयी,
उड़ान तेरी, आसमाँ तेरा है।
ना कर इंतज़ार किसी और का,
रास्ता तेरा, कारवाँ तेरा है।
हर सुबह लेकर आती है उम्मीद,
हर रात में छिपा नया सवेरा है।
जो बीत गया, उसे भूल जा तू,
आने वाला पल बस तेरा है।
मिटा दे हर वो दीवार जो रोके,
तेरी रूह में ही तो वो ताक़त है।
कर दे तू रोशन हर कोना इस जग का,
तेरी चाहत ही तेरी इबादत है।