प्रेरणा का सफर
Ghazal — By Furkan S Khan
Kaafiya: संबल, अचल, निकल, मचल, फल | Radeef: चल
हौसलों की राह पर, ऐ दिल ज़रा संभल, चल।
गिर के उठना है तुझे, बस तू हमेशा चल।
धूप हो या छाँव हो, हर हाल में तू अचल रह,
मंज़िलों की ओर अपनी, तू निडर हो चल।
भेद सारे खोल दे, अब डर से बाहर निकल,
जीत तेरी इंतज़ार में है, तू कदम बढ़ा चल।
ख्वाबों को उड़ान दे, क्यों यूँ ही तू मचल,
पर हैं तेरे पास, तू आसमान में चल।
फ़ुरक़ान कहे, हिम्मत न हार कभी, ओ नादान,
कर्म का ही मीठा मिलता है फल, तू बस आगे चल।
Ghazal — By Furkan S Khan
Kaafiya: कही, रही, वही, मही, यही | Radeef: सही
दिल में जो आग है, वो बात है कही, सही।
रास्ता वो ही है, जो मंजिल को दिखा दे सही।
छोड़ दे बंदिशें सब, जो तुझे रोके रही,
आज़ादी की उड़ान भर, अब उड़ जा तू सही।
तेरी तकदीर बदलेगी, अगर चाहत है वही,
मेहनत से सींच इसे, फल मिलेगा सही।
इस धरती (मही) पर तेरी पहचान है, तू क्यों डरा,
कर दे कुछ ऐसा कमाल, सब कहें तू है सही।
फ़ुरक़ान की कलम से, ये पैगाम है यही,
खुद पर रख विश्वास, राह तेरी होगी सही।