AI Poetry
हम और ज़िंदगी
उदासी का गीत: फ़ुरकान एस खान की हृदयस्पर्शी नज़्म
फ़ुरकान एस खान की 'उदासी का गीत' नज़्म में गहरे ग़म, अकेलेपन और जीवन की बेबसी को महसूस करें। हिंदी शायरी के प्रेमियों के लिए।
Nazm By Furkan S Khan
दिल में इक बोझ सा है, ये उदासी है कैसी?
हर तरफ़ एक सन्नाटा, ये ख़ामोशी है कैसी?
आँखों में नमी है, होंठों पे प्यासी हँसी,
ये ज़िंदगी की अब, बेबसी है कैसी?
Nazm By Furkan S Khan
ये जो ग़म का बोझ है, कम होता नहीं है
दिल में जो दर्द है, वो सोता नहीं है
हर रात तेरी याद में, दिल रोता ही रहता है
मेरी आँखों से आंसू, अब रुकता नहीं है
Nazm By Furkan S Khan
ये उदासी की घटा, क्यों छाई हुई है
हर खुशी की किरण, जैसे मुरझाई हुई है
दिल में बस एक चुभन, जो समाई हुई है
ज़िंदगी जैसे कोई, भूल बिसराई हुई है
न कोई आस बची, न कोई है सहारा
बस एक तन्हाई है, जो दिल में आई हुई है।
उदासी का गीत
Nazm — By Furkan S Khan
Kaafiya: उदासी, ख़ामोशी, हँसी, बेबसी | Radeef: है कैसी?
दिल में इक बोझ सा है, ये उदासी है कैसी?
हर तरफ़ एक सन्नाटा, ये ख़ामोशी है कैसी?
आँखों में नमी है, होंठों पे प्यासी हँसी,
ये ज़िंदगी की अब, बेबसी है कैसी?
Nazm — By Furkan S Khan
Kaafiya: होता, सोता, रोता, रुकता | Radeef: नहीं है
ये जो ग़म का बोझ है, कम होता नहीं है
दिल में जो दर्द है, वो सोता नहीं है
हर रात तेरी याद में, दिल रोता ही रहता है
मेरी आँखों से आंसू, अब रुकता नहीं है
Nazm — By Furkan S Khan
Kaafiya: छाई, मुरझाई, समाई, बिसराई, आई | Radeef: हुई है
ये उदासी की घटा, क्यों छाई हुई है
हर खुशी की किरण, जैसे मुरझाई हुई है
दिल में बस एक चुभन, जो समाई हुई है
ज़िंदगी जैसे कोई, भूल बिसराई हुई है
न कोई आस बची, न कोई है सहारा
बस एक तन्हाई है, जो दिल में आई हुई है।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
33°C Bahraich
INR
EUR
GBP
AED
SAR
AUD
CAD
PKR
BDT
QAR
KWD
OMR
Comments (0)