बहराइच में 13 अक्टूबर को मूर्ति विसर्जन के दौरान हुई हिंसा ने पूरे जिले को हिला दिया था। घटना के बाद, प्रशासन ने हालात को काबू में लाने के लिए 14 अक्टूबर को दोपहर करीब 2 बजे इंटरनेट सेवा पूरे जिले में बंद कर दी थी। प्रशासनिक अधिकारियों ने यह कदम अफवाहों और गलत सूचनाओं के फैलाव को रोकने के लिए उठाया था।
इंटरनेट सेवा पर 58 घंटे की रोक
पूरे 58 घंटों तक बहराइच जिले में इंटरनेट सेवा बंद रही। इस अवधि के दौरान, जिले के लोग सोशल मीडिया से कटे रहे, जिससे कई जरूरी कार्य भी प्रभावित हुए। यह रोक 17 अक्टूबर को रात 12 बजे हटाई गई और नेट सेवाएं फिर से बहाल कर दी गईं। जैसे ही इंटरनेट सेवा बहाल हुई, लोगों ने राहत की सांस ली और सोशल मीडिया पर दोबारा सक्रिय होना शुरू किया।
इंटरनेट चालू होते ही खुशी का माहौल
इंटरनेट सेवा के फिर से शुरू होने पर बहराइच के लोगों के बीच खुशी का माहौल देखा गया। खासकर युवा वर्ग, जो सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स से जुड़े रहते हैं, उन्होंने इसे लेकर खुशी जाहिर की। कई लोग, जिनके व्यवसाय इंटरनेट पर आधारित थे, उन्होंने भी राहत महसूस की।
एक स्थानीय व्यापारी ने बताया, "पिछले 58 घंटे बहुत मुश्किल भरे थे, क्योंकि हमारे अधिकतर ग्राहक ऑनलाइन ऑर्डर देते हैं और इंटरनेट बंद होने के कारण व्यापार ठप सा हो गया था।"
प्रशासन का बयान
प्रशासन का कहना है कि इंटरनेट सेवा को बंद करने का फैसला शांति बनाए रखने और अफवाहों को फैलने से रोकने के लिए लिया गया था। हालांकि, स्थिति नियंत्रण में आने के बाद इंटरनेट सेवाएं बहाल कर दी गई हैं।
जिलाधिकारी ने बताया, "हमने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए इंटरनेट सेवा को बंद किया था, ताकि किसी भी तरह की भ्रामक जानकारी और अफवाहें न फैले। अब हालात सामान्य हो गए हैं, इसलिए इंटरनेट सेवा फिर से शुरू कर दी गई है।"
भविष्य की तैयारी
बहराइच की यह घटना एक सबक है कि प्रशासन को भविष्य में किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहना चाहिए। हिंसा और अफवाहों को रोकने के लिए बेहतर संचार माध्यम और लोगों को जागरूक करना जरूरी है।