सऊदी अरब और 7 देशों ने इजरायल के वेस्ट बैंक फैसलों की कड़ी निंदा की | संयुक्त बयान 2026
सऊदी अरब, पाकिस्तान, तुर्किये और अन्य देशों के विदेश मंत्रियों ने वेस्ट बैंक में इजरायल की अवैध गतिविधियों के खिलाफ संयुक्त बयान जारी किया। जानें पूरा मामला।
Furkan S Khan Verified Public Figure • 05 Aug, 2014मुख्य संपादक
February 10, 2026 • 11:19 AM | सऊदी अरब 13 0
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“सऊदी अरब और 7 देशों ने इजरायल के वेस्ट बैंक फैसलों की कड़ी निंदा की | संयुक्त बयान 2026”
रियाद: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच, सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय ने रविवार को एक महत्वपूर्ण संयुक्त बयान जारी किया। सऊदी अरब, जॉर्डन, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कतर, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, मिस्र और तुर्किये के विदेश मंत्रियों ने एक स्वर में इजरायल द्वारा कब्जे वाले वेस्ट बैंक (West Bank) में उठाए गए हालिया कदमों की "कड़े शब्दों में निंदा" की है।
यह बयान 9 फरवरी, 2026 को जारी किया गया, जिसमें इन आठ प्रमुख मुस्लिम बाहुल्य देशों ने इजरायल पर अंतर्राष्ट्रीय कानूनों के उल्लंघन और फिलिस्तीनी क्षेत्रों के अवैध विलय (Annexation) की कोशिशों का आरोप लगाया है।
वेस्ट बैंक में संप्रभुता के दावे खारिज
जारी किए गए दस्तावेज के अनुसार, मंत्रियों ने इजरायल के उन फैसलों की आलोचना की है जिनका उद्देश्य वेस्ट बैंक में "अवैध संप्रभुता (Sovereignty)" थोपना है। संयुक्त बयान में कहा गया है कि इजरायल बस्तियों की गतिविधियों को बढ़ा रहा है और कब्जे वाले वेस्ट बैंक में एक नई कानूनी और प्रशासनिक वास्तविकता लागू करने की कोशिश कर रहा है।
"मंत्रियों ने फिर से पुष्टि की कि इजरायल का कब्जे वाले फिलिस्तीनी क्षेत्र पर कोई संप्रभु अधिकार नहीं है। ये कदम फिलिस्तीनी लोगों के विस्थापन और अवैध कब्जे को तेज करने का प्रयास हैं।"
शांति प्रक्रिया और 'टू-स्टेट सॉल्यूशन' को खतरा
विदेश मंत्रियों ने चेतावनी दी कि इजरायली सरकार द्वारा अपनाई जा रही विस्तारवादी नीतियां क्षेत्र में हिंसा और संघर्ष को और भड़काएंगी। बयान में स्पष्ट किया गया कि ये अवैध कार्रवाइयां अंतर्राष्ट्रीय कानून का "खुला उल्लंघन" हैं और टू-स्टेट सॉल्यूशन (दो-राज्य समाधान) की नींव को कमजोर करती हैं।
समूह ने जोर देकर कहा कि फिलिस्तीनी लोगों का यह अविभाज्य अधिकार है कि वे 4 जून 1967 की सीमाओं पर अपना स्वतंत्र और संप्रभु राज्य स्थापित करें, जिसकी राजधानी पूर्वी यरुशलम (East Jerusalem) हो।
संयुक्त राष्ट्र प्रस्तावों और ICJ की राय का हवाला
इस राजनयिक बयान में कानूनी आधार को मजबूत करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय अदालतों और संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों का विशेष उल्लेख किया गया है:
UN सुरक्षा परिषद प्रस्ताव 2334: यह प्रस्ताव स्पष्ट रूप से 1967 से कब्जे वाले फिलिस्तीनी क्षेत्रों (जिसमें पूर्वी यरुशलम शामिल है) की जनसांख्यिकीय संरचना और स्थिति को बदलने के किसी भी इजरायली उपाय की निंदा करता है।
ICJ की 2024 की सलाहकार राय: बयान में अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय (International Court of Justice) की 2024 की राय का हवाला दिया गया, जिसमें कहा गया था कि फिलिस्तीनी क्षेत्रों में इजरायल की निरंतर उपस्थिति और उसकी नीतियां "अवैध" हैं और इस कब्जे को समाप्त किया जाना चाहिए।
अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से अपील
संयुक्त बयान के अंत में, आठों देशों ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से अपनी कानूनी और नैतिक जिम्मेदारियों को पूरा करने का आह्वान किया। उन्होंने मांग की कि दुनिया के बड़े देश इजरायल को वेस्ट बैंक में खतरनाक स्थिति को बढ़ाने से रोकें और अधिकारियों द्वारा दिए जा रहे भड़काऊ बयानों पर लगाम लगाएं।
मंत्रियों ने निष्कर्ष निकाला कि क्षेत्र में व्यापक और न्यायसंगत शांति केवल अरब शांति पहल (Arab Peace Initiative) और अंतर्राष्ट्रीय वैधता के प्रस्तावों के आधार पर फिलिस्तीनी लोगों को उनके आत्मनिर्णय का अधिकार देने से ही संभव है।
Furkan S Khan Verified Public Figure • 05 Aug, 2014मुख्य संपादक
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