बीते लम्हों की ख़ुशबू: Furkan S Khan की दिल छू लेने वाली हिन्दी Sher
Furkan S Khan द्वारा लिखी गई 'बीते लम्हों की ख़ुशबू' कविता, पुरानी यादों और बीते हुए कल के सुखद पलों को दर्शाती है। यह दिल को छू लेने वाली हिन्दी Sher है।
चौबारा: घर का ऊपरी कमरा या छज्जा। ज़माना: समय, काल। धूल जमी: पुरानी हो गई। धुंधलाई: फीकी पड़ गई। शरारतें: नटखट हरकतें। ठिठोली: हँसी-मज़ाक। सुहाना: सुखद, आनंददायक। सरगम: संगीत का सुर। ख़ज़ाना: खजाना, अनमोल धन। मचल रहा है: बेचैन है, उत्साहित है।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
29°C Bahraich
Comments (0)