उदासी का मंज़र: दिल को छू लेने वाली हिंदी क़िता | Furkan S Khan

फरकान एस खान द्वारा रचित 'उदासी का मंज़र' एक मार्मिक हिंदी क़िता है जो जीवन की उदासी और अकेलेपन को शब्दों में बयां करती है। भावनाओं का गहरा अनुभव।

Saturday, September 19, 2026
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उदासी का मंज़र: दिल को छू लेने वाली हिंदी क़िता | Furkan S Khan
“उदासी का मंज़र: दिल को छू लेने वाली हिंदी क़िता | Furkan S Khan”
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19 September 2026
उदासी का मंज़र: दिल को छू लेने वाली हिंदी क़िता | Furkan S Khan
Qita — By Furkan S Khan
दिल में इक उदासी है छाई है, होठों पे हँसी भी पराई है। अश्कों से हर रात भीगी है, ज़िंदगी भी अब लगती फीकी है।
Qita — By Furkan S Khan
तन्हाई की अब एक पुकार है, हर दिल में छुपा कोई खार है। ढूँढता फिरता हूँ कोई यार है, ये ज़िंदगी भी अब बेक़रार है।
Qita — By Furkan S Khan
छूटा उम्मीदों का दामन है, कहाँ अब मिलता दिल को अमन है। हर साँस में बस भरा ग़म है, रोता अंदर ही अंदर ये मन है।

उदासी: मायूसी, दुख। पराई: अपनी न लगना, बेगानी। भीगी: आँसुओं से तर। फीकी: बेरंग, बेस्वाद, नीरस।

तन्हाई: अकेलापन। पुकार: आवाज़, बुलाना। खार: काँटा, दुख, पीड़ा। यार: दोस्त, साथी। बेक़रार: बेचैन, अशांत।

दामन: आँचल, साथ। अमन: शांति, सुकून। ग़म: दुख, उदासी। मन: हृदय, चित्त।

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Zainab Khatoon
लेखक

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