गम का आलम: फरकान एस खान की उदास ग़ज़ल
फरकान एस खान द्वारा रचित 'गम का आलम' ग़ज़ल में गहरे दुख और अकेलेपन की भावना को महसूस करें। दिल को छू लेने वाली हिंदी शायरी।
गम: दुख, पीड़ा घुला: घुल गया, समा गया दिए: दीपक, उम्मीदें रौशनी: प्रकाश सपनों: ख्वाबों तन्हाई: अकेलापन निभाओ: पूरा करो, जियो
असर: प्रभाव रिसता: टपकता हुआ बंजर: अनुपजाऊ, खाली सर्द: ठंडा उजाड़ा: बर्बाद किया हुआ तन्हाई: अकेलापन हालात-ए-दिल: दिल के हालात, मन की दशा
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
28°C Bahraich
Comments (0)