उदासी का रंग: फ़ुरक़ान एस ख़ान की दिल छू लेने वाली नज़्म
फ़ुरक़ान एस ख़ान की यह नज़्म उदासी के गहरे रंगों को बयां करती है। भावनाओं और अकेलापन को दर्शाती एक मार्मिक कविता।
धुन: संगीत, लय घुलती: घुल जाना, मिल जाना धुंधलाए: अस्पष्ट हो जाना, फीके पड़ना छाई: फैल जाना नमी: गीलापन लबों: होंठों तन्हाई: अकेलापन परछाई: साया, प्रतिबिंब
गहरा उतरता है: अंदर तक महसूस होता है साया: परछाई उभरता है: सामने आता है बोझ: भार गुज़रता है: बीतता है नमी: गीलापन लबों: होंठों एहसास: भावना मरता है: खत्म होता है जिस्म: शरीर रूह: आत्मा
ज़ख्म: घाव, चोट उभरते हैं: फिर से सामने आते हैं आवाज़: ध्वनि, पुकार डरते हैं: भयभीत होते हैं बिखरते हैं: टूट कर फैल जाते हैं सफर: यात्रा मंज़िल: लक्ष्य, गंतव्य गिरते-संवरते हैं: गिरते हैं और फिर उठते हैं
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