प्रेरणादायक नज़्म: सवेरा है, उठो! - जीवन में आगे बढ़ने की सीख

फुरकान एस खान द्वारा एक प्रेरणादायक नज़्म जो आपको नींद से जगाकर जीवन में आगे बढ़ने और मुश्किलों का सामना करने की हिम्मत देती है। हर पल को अवसर बनाने की सीख।

Wednesday, August 26, 2026
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प्रेरणादायक नज़्म: सवेरा है, उठो! - जीवन में आगे बढ़ने की सीख
“प्रेरणादायक नज़्म: सवेरा है, उठो! - जीवन में आगे बढ़ने की सीख”
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26 August 2026
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Nazm By Furkan S Khan
ये रात ढली, नया सवेरा है, उठो, अब नींद से जागो, तुम। जो खोया कल, भुला दो उसे तुम, नया अध्याय लिखने, तुम। न डरना कभी राह की मुश्किलों से, हर बाधा को पार करने, तुम। ये जीवन एक अवसर है अनमोल, बस आगे ही आगे बढ़ो, तुम।
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Nazm By Furkan S Khan
ख़ामोश न बैठो, ये वक़्त नहीं, चलो, मंज़िल तुम्हें पुकारती है। हर कदम पर रखो विश्वास गहरा, मेहनत से हर राह संवारती है। राहों की धूल गर आँखों में आए, पोंछ लो, हर मुश्किल गुज़रती है। रुकना नहीं है, थकना नहीं है, जीत की डगर सदा निखरती है।
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Nazm By Furkan S Khan
अंधेरी रात के बाद ही तो, उजला सवेरा आता है। जो गिर के उठता है फिर से, वही तो मंज़िल पाता है। न सोचो तुम अकेले हो कभी, खुदा हरदम तुम्हारे साथ है। बस रखो हौसला अपने दिल में, हर पल एक नई शुरुआत है।

सवेरा है, उठो!

Nazm — By Furkan S Khan

Kaafiya: जागो, लिखने, करने, बढ़ो  |  Radeef: तुम
ये रात ढली, नया सवेरा है, उठो, अब नींद से जागो, तुम। जो खोया कल, भुला दो उसे तुम, नया अध्याय लिखने, तुम। न डरना कभी राह की मुश्किलों से, हर बाधा को पार करने, तुम। ये जीवन एक अवसर है अनमोल, बस आगे ही आगे बढ़ो, तुम।

Nazm — By Furkan S Khan

Kaafiya: पुकारती, संवारती, गुज़रती, निखरती  |  Radeef: है
ख़ामोश न बैठो, ये वक़्त नहीं, चलो, मंज़िल तुम्हें पुकारती है। हर कदम पर रखो विश्वास गहरा, मेहनत से हर राह संवारती है। राहों की धूल गर आँखों में आए, पोंछ लो, हर मुश्किल गुज़रती है। रुकना नहीं है, थकना नहीं है, जीत की डगर सदा निखरती है।

Nazm — By Furkan S Khan

Kaafiya: आता, पाता, साथ, शुरुआत  |  Radeef: है
अंधेरी रात के बाद ही तो, उजला सवेरा आता है। जो गिर के उठता है फिर से, वही तो मंज़िल पाता है। न सोचो तुम अकेले हो कभी, खुदा हरदम तुम्हारे साथ है। बस रखो हौसला अपने दिल में, हर पल एक नई शुरुआत है।

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Zainab
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