खामोशी का दर्द: Furkan S Khan की एक दिल छू लेने वाली क़ि़ता

Furkan S Khan द्वारा लिखी गई यह ख़ि़ता खामोशी और अकेलेपन के गहरे दर्द को बयां करती है।

Wednesday, September 16, 2026
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खामोशी का दर्द: Furkan S Khan की एक दिल छू लेने वाली क़ि़ता
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Date
16 September 2026
Qita — By Furkan S Khan
जब दिल उदास हो, और कोई साथ न हो, हर लम्हा जैसे कटता ही नहीं, भीड़ में भी मैं खुद को अकेला पाता हूँ, ये कैसा मंजर है, सब कुछ बेगाना है।
Qita — By Furkan S Khan
लबों पर हँसी है, पर आँखों में नमी है, छुपाता फिरता हूँ, जो अंदर कमी है। हर खुशी से दिल मेरा क्यों तरसता है, क्यूं हर पल ये तन्हाई ही बरसता है।

उदासी: मन की एक विशेष अवस्था जो दुख या निराशा से भरी हो। लम्हा: पल, क्षण। मंजर: दृश्य, नज़ारा। बेगाना: पराया, अजनबी।

नमी: गीलापन, आँसुओं का भाव। छुपाता: छिपाता, गुप्त रखता। कमी: अभाव, खालीपन। तरसता: किसी चीज़ की तीव्र इच्छा रखना। बरसता: गिरना, छलकना।

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Zainab
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