मोहब्बत का सफ़र: फ़ुरक़ान एस ख़ान की नाज़्म

फ़ुरक़ान एस ख़ान द्वारा रचित एक ख़ूबसूरत नाज़्म 'मोहब्बत का सफ़र'। इश्क़ के अहसास और दिल की गहराइयों को दर्शाती यह कविता।

Thursday, August 27, 2026
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मोहब्बत का सफ़र: फ़ुरक़ान एस ख़ान की नाज़्म
“मोहब्बत का सफ़र: फ़ुरक़ान एस ख़ान की नाज़्म”
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Date
27 August 2026
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Nazm By Furkan S Khan
मोहब्बत एक अहसास है, जो दिल में ठहरता है, हर साँस में इकरार है, जो चुपके से उभरता है। ये रूह की प्यास है, जो हर पल तड़पता है, हाँ, यही तो इश्क़ है, जो जीना सिखाता है।
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Nazm By Furkan S Khan
ये इश्क़ का जादू है, जो सर चढ़कर बोलता है, हर बंद दरवाज़ा, ये पल भर में खोलता है। कभी दर्द बनता है, कभी अमृत घोलता है, दिल की हर धड़कन में, बस तू ही डोलता है।

मोहब्बत का सफ़र

Nazm — By Furkan S Khan

Kaafiya: ठहरता, उभरता, तड़पता, सिखाता  |  Radeef: है
मोहब्बत एक अहसास है, जो दिल में ठहरता है, हर साँस में इकरार है, जो चुपके से उभरता है। ये रूह की प्यास है, जो हर पल तड़पता है, हाँ, यही तो इश्क़ है, जो जीना सिखाता है।

Nazm — By Furkan S Khan

Kaafiya: बोलता, खोलता, घोलता, डोलता  |  Radeef: है
ये इश्क़ का जादू है, जो सर चढ़कर बोलता है, हर बंद दरवाज़ा, ये पल भर में खोलता है। कभी दर्द बनता है, कभी अमृत घोलता है, दिल की हर धड़कन में, बस तू ही डोलता है।

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Zainab
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