प्रेरणादायक ग़ज़ल: उठो, चलो! - जीवन में आगे बढ़ने का संदेश
'फुरकान एस खान' द्वारा एक प्रेरणादायक ग़ज़ल जो आपको जीवन की चुनौतियों का सामना करने और कभी हार न मानने के लिए प्रोत्साहित करती है।
डगमगाए कदम: जब पैर लड़खड़ाएं, मुश्किल में हों। हौसला: हिम्मत, साहस। मंज़िल: लक्ष्य, गंतव्य। राह मोड़ना: रास्ता बदलना, दिशा तय करना। चाह: इच्छा, अभिलाषा। मायूसियों: निराशाओं, उदासी। आह भरना: दुख व्यक्त करना। निगाह: दृष्टि, नज़र। गुमराह: भटका हुआ, रास्ता भूला हुआ।
सवेरा: सुबह, प्रभात। बसेरा: निवास, आश्रय। अँधेरा: अंधकार, निराशा। डेरा: ठिकाना, स्थान। जज़्बा: उत्साह, जुनून। फेरा: चक्कर, बारी। हमसफ़र: सहयात्री, साथी।
किनारा: तट, छोर। सहारा: अवलंब, मदद। इशारा: संकेत, संकेत। नज़ारा: दृश्य, मनोरम दृश्य। पथ: रास्ता, मार्ग। लगन: निष्ठा, एकाग्रता। कर्म: कार्य, क्रिया। धारा: प्रवाह, सिलसिला।
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