उदासी का कारवाँ: फ़ुरकान एस ख़ान की दर्द भरी ग़ज़ल
दिल में छुपे दर्द और तन्हाई को बयाँ करती फ़ुरकान एस ख़ान की ये ग़ज़ल उदासी के गहरे रंगों को दर्शाती है।
बेज़ुबाँ: जिसे ज़ुबान न हो, जो बोल न सके। कारवाँ: यात्रा, काफिला, लगातार चलना। वास्ता: संबंध, नाता। निशान: चिह्न, पहचान। बयाँ: वर्णन, कहना।
करार: चैन, शांति। बहारें: खुशियाँ, अच्छा समय। इंतज़ार: प्रतीक्षा। गुज़ार: गुज़रना, होना। (यहाँ "गुज़ार नहीं" का अर्थ है कोई रास्ता या ठिकाना नहीं) इकरार: स्वीकारोक्ति, सहमति।
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