मोहब्बत का पैग़ाम: Furkan S Khan की दिल छू लेने वाली नज़्म

Furkan S Khan की ख़ूबसूरत नज़्म 'मोहब्बत का पैग़ाम' प्यार के गहरे एहसास को बयाँ करती है। यह नज़्म बताती है कि कैसे मोहब्बत हर दिल में रहती है और हर पल साथ निभाती है।

Thursday, September 17, 2026
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मोहब्बत का पैग़ाम: Furkan S Khan की दिल छू लेने वाली नज़्म
“मोहब्बत का पैग़ाम: Furkan S Khan की दिल छू लेने वाली नज़्म”
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Date
17 September 2026
Nazm — By Furkan S Khan
मोहब्बत एक ऐसा जज़्बा है, जो हर दिल में रहता है। कभी आँसुओं में ढलकर, कभी हँसी में बहता है। ये वो ज़ुबाँ है जो बिन बोले, हर बात को कहता है, हर साँस में घुल कर, ये साथ हमेशा रहता है।
Nazm — By Furkan S Khan
प्रेम ही तो है जो जीवन को, इक नई पहचान देती है। हर सूखी डाली पर, फूलों की मुस्कान देती है। ये ही तो है वो राह, जो मंज़िल का निशान देती है, और टूटते हुए दिल को, फिर से नया अरमान देती है।

जज़्बा: भावना, एहसास। ढलकर: बदलकर, परिवर्तित होकर। ज़ुबाँ: भाषा, बोली। बिन बोले: बिना कुछ कहे। घुल कर: मिलकर, समाकर।

अज़मत: महिमा, grandeur, महानता। पहचान: identity, पहचान। मुस्कान: हँसी, smile। राह: रास्ता, path। मंज़िल: लक्ष्य, destination। निशान: चिन्ह, mark। अरमान: इच्छा, desire, aspiration।

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Zainab
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