उदासी की चादर: फ़ुरक़ान एस ख़ान की दर्द भरी नज़्म

फ़ुरक़ान एस ख़ान की इस भावुक नज़्म 'उदासी की चादर' में अकेलेपन और गहरे दर्द की मार्मिक अभिव्यक्ति पढ़ें। यह कविता उदासी के हर पहलू को छूती है।

Thursday, September 17, 2026
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उदासी की चादर: फ़ुरक़ान एस ख़ान की दर्द भरी नज़्म
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17 September 2026
उदासी की चादर: फ़ुरक़ान एस ख़ान की दर्द भरी नज़्म
Nazm — By Furkan S Khan
हर तरफ़ एक उदासी की चादर फैली है, रूह मेरी अब तो बस अकेली है। ख़ुशियों की बातें अब लगती हैं बेमानी, दर्द की हर लहर है अब तो सुहानी। आँखों में नमी, दिल में है सन्नाटा गहरा, कैसे कह दूँ कि आएगा कोई सवेरा? साँसों में घुली है एक बोझिल सी उदासी, अब तो बस यादों की है ये प्यासी।
Nazm — By Furkan S Khan
टूटते ख़्वाबों की है ये कहानी, हर लम्हा है अब तो बस बेगानी। दिल के हर कोने में है वीरानी, न कोई अपना, न कोई निशानी। आँखों से बहते हैं अश्कों के धारे, कौन सुनेगा अब दिल के पुकारे? ग़म के साये में ढली है हर रात, सूनी है अब तो हर दिन की बात।
Nazm — By Furkan S Khan
ख़ामोशी का एक गहरा शोर है, रूह में फैला हुआ हर ओर है। लबों पर मुस्कान, पर दिल उदास, कौन समझेगा इस बेबस की प्यास? भीड़ में भी तन्हाई का एहसास है, हर ख़ुशी अब तो बस एक त्रास है। अंधेरों में डूबी हर एक राह, न कोई मंज़िल, न कोई परवाह।

यह नज़्म उदासी और अकेलेपन की गहरी भावना को व्यक्त करती है। कवि बताता है कि कैसे उसके चारों ओर उदासी की चादर फैली हुई है और उसकी आत्मा अकेली महसूस करती है। ख़ुशियाँ अब बेमानी लगती हैं और दर्द ही अब सुकून देता है। दिल में गहरा सन्नाटा है और किसी नए सवेरे की उम्मीद नहीं। साँसों में भी उदासी घुली है और आत्मा केवल यादों की प्यासी है।

यह नज़्म टूटे हुए सपनों, अकेलेपन और गहरे दुःख को दर्शाती है। कवि महसूस करता है कि उसकी ज़िन्दगी अब बेगानी हो गई है और दिल के हर कोने में वीरानी छाई है। आँसू लगातार बह रहे हैं, पर कोई सुनने वाला नहीं। हर रात ग़म के साये में ढली है और दिन की बातें भी सूनी हो गई हैं।

यह नज़्म उस आंतरिक उदासी को बयां करती है जो बाहर से शांत दिखती है पर भीतर से शोर मचाती है। कवि के होंठों पर मुस्कान है, पर दिल उदास है और उसकी बेबस प्यास को कोई नहीं समझता। भीड़ में भी उसे तन्हाई का एहसास होता है और हर ख़ुशी एक पीड़ा बन गई है। जीवन की हर राह अंधेरों में डूबी है, कोई मंज़िल या परवाह नहीं दिखती।

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Zainab
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