उदासी की लहर: फरकान एस खान की मार्मिक ग़ज़ल
फरकान एस खान द्वारा रचित 'उदासी की लहर' एक मार्मिक ग़ज़ल है जो दिल के गहरे दर्द और छिपी हुई उदासी को बयां करती है। भावनाओं से भरी यह कविता जीवन के हर मोड़ पर मिलने वाले दुखों को दर्शाती है।
उदासी: विषाद, दुख लहर: तरंग, वेव ज़हर: विष नहर: छोटी नदी, धारा बेकरार: बेचैन, अशांत सहर: जादू, आकर्षण (यहाँ दुःख छिपाने का) कहर: विपत्ति, संकट बहर: समुद्र, प्रवाह (यहाँ भावनाओं का गहरा प्रवाह)
खामोशी: चुप्पी, सन्नाटा रात: रात्रि बात: विचार, कथन ज़ात: अस्तित्व, स्वयं (यहाँ अपनी परछाई का अस्तित्व) घात: धोखा, चोट जुदाई: विरह, अलगाव तन्हा: अकेला सौगात: भेंट, उपहार (यहाँ आँसुओं का)
दर्द: पीड़ा, वेदना सर्द: ठंडा, उदासीन हमदर्द: सहानुभूति रखने वाला, साथी बेदर्द: निर्दयी, कठोर लौ: ज्वाला, रोशनी गर्द: धूल ज़र्द: पीला, मुरझाया हुआ
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