शाम-ए-ग़म की तन्हाइयों में | शायरी फुरकान एस खान
शाम-ए-ग़म की तन्हाइयों में, कोई अपना सा लगे, धड़कनों की इस ख़ामोशी में, कोई नग़मा सा लगे। शायरी फुरकान एस खान
शाम-ए-ग़म की तन्हाइयों में, कोई अपना सा लगे,
धड़कनों की इस ख़ामोशी में, कोई नग़मा सा लगे।