मद्रास HC का ऐतिहासिक फैसला: 30-हफ़्ते की गर्भावस्था समाप्त करने की इजाज़त, नाबालिग यौन उत्पीड़न पीड़िता को मिली राहत
मद्रास उच्च न्यायालय ने एक नाबालिग यौन उत्पीड़न पीड़िता को 30-सप्ताह के गर्भ को समाप्त करने की अनुमति दी है। यह फैसला महिला के अधिकारों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।
Key Highlights
- मद्रास उच्च न्यायालय ने एक नाबालिग यौन उत्पीड़न पीड़िता को 30 सप्ताह की गर्भावस्था समाप्त करने की अनुमति दी।
- अदालत ने पीड़ित के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी, मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट पर भरोसा किया।
- यह फैसला मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (MTP) एक्ट के तहत असाधारण परिस्थितियों में आया है।
चेन्नई: मद्रास उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण और संवेदनशील मामले में फैसला सुनाते हुए एक नाबालिग यौन उत्पीड़न पीड़िता को 30 सप्ताह की गर्भावस्था को समाप्त करने की अनुमति दे दी है। यह निर्णय पीड़िता के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए लिया गया है, जिसने न्यायपालिका की संवेदनशीलता को उजागर किया है।
न्यायमूर्ति आनंद वेंकटेश की एकल पीठ ने इस मामले की सुनवाई की। अदालत ने पाया कि 13 साल की पीड़िता एक जघन्य अपराध की शिकार हुई थी। उसके साथ हुए भयावह अनुभव ने उसे गहरे सदमे में डाल दिया था। मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट इस फैसले में निर्णायक साबित हुई।
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