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हलाला की हकीकत: क़ुरान और हदीस की रौशनी में सच्चाई - नियोग प्रथा क्या है? | क्या नियोग प्रथा आज भी प्रचलित है?

इस्लाम में प्रचलित 'हलाला' का सच क्या है? जानें क़ुरान और हदीस इस साज़िशन शादी को क्यों हराम कहते हैं। इसका सही मक़सद क्या है और यह नियोग प्रथा से कैसे अलग है।

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Thursday, October 23, 2025
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हलाला की हकीकत: क़ुरान और हदीस की रौशनी में सच्चाई - नियोग प्रथा क्या है? | क्या नियोग प्रथा आज भी प्रचलित है?
“हलाला की हकीकत: क़ुरान और हदीस की रौशनी में सच्चाई - नियोग प्रथा क्या है? | क्या नियोग प्रथा आज भी प्रचलित है?”
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23 October 2025
हलाला की हकीकत: क़ुरान और हदीस की रौशनी में सच्चाई - नियोग प्रथा क्या है? | क्या नियोग प्रथा आज भी प्रचलित है?
हलाला और नियोग प्रथा की तुलना करता हुआ एक ग्राफिकल थंबनेल। चेतावनी: यह छवि AI द्वारा केवल दृष्टांत उद्देश्यों के लिए उत्पन्न की गई है।

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"इस्लाम 'हलाला' का हुक्म देता है, जिसके तहत एक तलाक़शुदा औरत को अपने पहले पति के पास वापस जाने के लिए किसी दूसरे मर्द से एक रात की शादी करनी पड़ती है।"

False Misleading Half True True
Claim: Half True

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Fact Checked By Furkan S Khan

इस्लाम में "हलाला" एक ऐसा शब्द है, जिसे लेकर अक्सर गैर-मुस्लिमों द्वारा तंज़ किया जाता है और कई मुसलमान भी इसे लेकर भ्रम की स्थिति में रहते हैं। इस आर्टिकल का मक़सद क़ुरान और हदीस के असल हवालों के साथ यह स्पष्ट करना है कि जिसे आज "हलाला" कहा जाता है, उसका इस्लाम से कोई संबंध नहीं है, बल्कि इस्लाम इसकी कड़ी निंदा करता है।

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