जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान जासूसी नेटवर्क के खिलाफ बड़ी मुहिम: 'दोस्ताना कॉल' ही धोखा!
जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तानी जासूसी नेटवर्क के खिलाफ पुलिस की बड़ी कार्रवाई। जानिए कैसे 'दोस्ताना कॉल' बन रहा है युवाओं के लिए जाल।
मुख्य बातें
- जम्मू-कश्मीर में युवाओं को पाक जासूसी नेटवर्क के जाल से बचाने के लिए पुलिस ने विशेष अभियान शुरू किया है।
- 'दोस्ताना कॉल' या सोशल मीडिया पर दोस्ती के बहाने युवाओं को निशाना बनाया जा रहा है।
- सुरक्षा एजेंसियां भ्रमित करने वाले संदेशों से सावधान रहने की सलाह दे रही हैं।
'दोस्ताना कॉल' ही धोखा: पाक जासूसी नेटवर्क के खिलाफ जम्मू-कश्मीर में बड़ा अभियान
जम्मू-कश्मीर में युवाओं को राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों में फंसाने वाले पाकिस्तानी जासूसी नेटवर्क के खिलाफ एक बड़े पैमाने पर जागरूकता और बचाव अभियान चलाया जा रहा है। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने पाया है कि दुश्मन ताकतें भोले-भाले युवाओं को निशाना बनाने के लिए 'दोस्ताना कॉल' और सोशल मीडिया पर दोस्ती को एक प्रभावी माध्यम के रूप में इस्तेमाल कर रही हैं। यह अभियान विशेष रूप से उन युवा लड़कों पर केंद्रित है जो राष्ट्र-विरोधी ताकतों के आसानी से शिकार बन सकते हैं।
सोशल मीडिया पर दोस्ती का जाल: कैसे फंसाते हैं एजेंट
खुफिया सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान स्थित ऑपरेटिव सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर फर्जी प्रोफाइल का उपयोग करके युवाओं से संपर्क करते हैं। वे दोस्ती का नाटक करते हैं, पैसों का लालच देते हैं या कभी-कभी भावनात्मक ब्लैकमेलिंग का सहारा लेते हैं। इन कॉल और संदेशों की शुरुआत अक्सर एक सामान्य बातचीत से होती है, लेकिन धीरे-धीरे यह युवाओं को संवेदनशील जानकारी साझा करने या राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के लिए उकसाने का रूप ले लेती है। यह एक तरह का साइकोलॉजिकल ऑपरेशन है, जिसका उद्देश्य स्थानीय युवाओं के मन में भारत के खिलाफ नफरत पैदा करना है।
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