आग का दरिया - Furkan S Khan द्वारा एटीट्यूड शायरी

Furkan S Khan द्वारा रचित एक शक्तिशाली एटीट्यूड शायरी जो गुस्से और आत्म-सम्मान को दर्शाती है।

Sunday, September 20, 2026
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आग का दरिया - Furkan S Khan द्वारा एटीट्यूड शायरी
“आग का दरिया - Furkan S Khan द्वारा एटीट्यूड शायरी”
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20 September 2026
आग का दरिया - Furkan S Khan द्वारा एटीट्यूड शायरी
Attitude Shayari — By Furkan S Khan
मेरे सब्र की हद को अब तू ना नाप, मेरी खामोशी के पीछे एक तूफान छिपा है। तूने समझा था कि मैं राख हो चुका हूँ, मगर मेरी रगों में अभी भी लावा दबा है। मेरे उसूलों से टकराने की जुर्रत ना कर, तेरा हर एक वार मुझ पर ही फिदा है। मैं वो आईना हूँ जो सच का अक्स दिखाता है, तुझे अपनी हकीकत से अब डर लगता है। मेरी सादगी को मेरी कमजोरी मत समझ, ये तो शेर के शिकार से पहले का सन्नाटा है। अब जो उठी मेरी रूह की ये चिंगारी, तो तेरी दुनिया का वजूद भी जलता है। खुद को खुदा समझने की भूल ना कर, वक्त आने पर हर तख्त यहाँ गिरता है। तूने खेल खेला था मेरी सादगी के साथ, अब देख मेरी आग का मंजर क्या होता है।
Attitude Shayari — By Furkan S Khan
मेरी शख्सियत का कोई और मुकाम नहीं, मैं वो हूँ जिसका कोई गुलाम नहीं। मेरी आँखों में जो सुर्ख आग दिखती है, वो किसी बेअसर बात का पैगाम नहीं। तू अपनी चालाकी अपने पास रख ऐ दोस्त, मेरे उसूलों की कोई और शाम नहीं। मैंने खुद को तराशा है पत्थरों से लड़कर, मैं वो नहीं जिसे कोई भी कर ले काम। मेरे तेवर में है फौलाद की सी सख्ती, मैं वो मंजर हूँ जिसका कोई अंजाम नहीं। तूने हाथ बढ़ाया था दोस्ती के नाम पर, मगर अब तेरे लिए मेरे दिल में कोई नाम नहीं। मैं झुकना नहीं जानता ये फितरत है मेरी, मेरे स्वाभिमान का कोई और मुकाम नहीं। अब जो तूने छेड़ा है तो अंजाम देख, मेरे गुस्से का फिर कोई भी सलाम नहीं।

जुर्रत: हिम्मत, अक्स: परछाई, वजूद: अस्तित्व, तख्त: सिंहासन, मंजर: दृश्य

शख्सियत: व्यक्तित्व, मुकाम: स्थान, सुर्ख: लाल, फौलाद: मजबूत लोहा, फितरत: आदत

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Mahira Noor
संपादक

A passionate poet who weaves emotions into beautiful words. Writing about love, heartbreak, dreams, and life, one verse at a time.

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