अग्नि और अरण्य - प्रकृति और जुनून पर एक कविता

प्रकृति के तत्वों के माध्यम से जुनून और मानवीय भावनाओं को दर्शाती एक सुंदर हिंदी कविता।

Sunday, September 20, 2026
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अग्नि और अरण्य - प्रकृति और जुनून पर एक कविता
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20 September 2026
अग्नि और अरण्य - प्रकृति और जुनून पर एक कविता
Nature Poetry — By Furkan S Khan
जैसे उपवन में बसी कोई पुरानी आग है, पत्तों के शोर में छिपी एक अनकही राग है। सूखी टहनियों का टूटना भी एक शोर है, भीतर सुलगते जज्बात का यह कैसा दौर है। बादलों की गर्जना में छिपा एक गहरा साज है, बिजली की चमक में प्रकृति का अपना राज है। बहती नदी का वेग जैसे कोई पुराना मिजाज है, मौन पहाड़ों की चोटियों से शुरू हुआ आगाज है। जंगल की गहराई में धड़कती एक प्यास है, फूलों के खिलने में भी एक अटूट विश्वास है। मिट्टी की सोंधी महक में लिपटी हुई रूह है, बढ़ती हुई इस जुनून की कोई न कोई सुबह है। धूप की किरणें जब धरती को छूकर जाती हैं, बंजर जमीन में भी नई उम्मीदें जगाती हैं। यह प्रकृति का नियम है, यह उसकी रवानगी है, इश्क की तपिश ही तो जीवन की असली बंदगी है।

राग: संगीत या धुन, मिजाज: स्वभाव, आगाज: शुरुआत, रवानगी: बहाव या गति, बंदगी: आराधना या समर्पण।

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Mahira Noor
संपादक

A passionate poet who weaves emotions into beautiful words. Writing about love, heartbreak, dreams, and life, one verse at a time.

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