मृत्यु के बाद का खालीपन: एक दर्द भरी कविता

मृत्यु के बाद की तड़प और यादों को बयां करती एक भावुक हिंदी कविता।

Sunday, September 20, 2026
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मृत्यु के बाद का खालीपन: एक दर्द भरी कविता
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20 September 2026
मृत्यु के बाद का खालीपन: एक दर्द भरी कविता
Heartbreak Poetry — By Furkan S Khan
तुम्हारी याद का अब भी यहाँ एक गहरा साया है, तुम्हारे बिन ये घर अब जैसे एक वीरान माया है। वो मेज़ पर रखी किताब, वो चाय का प्याला ठंडा है, तुम्हारे जाने के बाद से वक्त भी जैसे ठहर सा गया है। तुम्हारी हँसी की गूँज अब कमरों में ढूँढता हूँ मैं, तुम्हारी कमी का अहसास मुझे हर पल रुलाता है। सितारे भी अब बुझे-बुझे से आसमान में दिखते हैं, जैसे किसी अपने के बिछड़ने का गम उन्होंने भी पाया है। तस्वीरें तो बोलती हैं मगर तुम खामोश बैठे हो, तुम्हारी अनुपस्थिति का शोर रूह को चीर जाता है। सब कहते हैं वक्त घाव भर देता है मरहम बनकर, मगर मैंने तो इस दर्द में ही खुद को खोया और पाया है। अब तो बस यादों की राख ही बची है मेरे पास, तुम्हारे जाने से मेरा पूरा वजूद ही मिट्टी में जाया है।
Heartbreak Poetry — By Furkan S Khan
धुंधली सी पड़ गई हैं वो गलियाँ जहाँ हम साथ चलते थे, आज उन रास्तों पर सिर्फ मेरी तन्हाई का शोर है। तुम तो चले गए उस पार, जहाँ से कोई लौटता नहीं, मेरे हाथ में बस तुम्हारी कुछ धुंधली यादों की डोर है। दीवारों पर टंगी घड़ियाँ अब टिक-टिक करना भूल गई हैं, जैसे मौत ने वक्त को भी एक ठहरी हुई बेड़ी में बांध दिया है। मैं पूछता हूँ हवाओं से कि क्या तुमने उसे कहीं देखा है? हवाएं चुप हैं, जैसे उन्होंने भी मेरा दर्द पहचान लिया है। अंधेरा अब दोस्त बन गया है इस टूटे हुए दिल का, रोशनी से तो अब मुझे एक अजीब सा डर लगता है। तुम वापस नहीं आओगे, ये जानते हुए भी दिल मानता नहीं, तुम्हारी यादों का बोझ अब मुझसे और सहा नहीं जाता है। खामोश हो गई हैं जुबां, बस आँखें ही बातें करती हैं, तुमसे बिछड़कर मैंने जीना भी अब शायद भुला दिया है।

वीरान: सुनसान, निर्जन। वजूद: अस्तित्व। रूह: आत्मा। अनुपस्थिति: गैर-मौजूदगी।

तन्हाई: अकेलापन। बेड़ी: जंजीर। जुबां: जीभ।

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Mahira Noor
संपादक

A passionate poet who weaves emotions into beautiful words. Writing about love, heartbreak, dreams, and life, one verse at a time.

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