गम का दरिया: फरकान एस खान की उदासी भरी शायरी

फरकान एस खान की दिल को छू लेने वाली उदासी भरी शायरी। गम और अकेलेपन को बयां करते ये अल्फाज़। पढ़ें और महसूस करें दर्द की गहराई।

Tuesday, September 1, 2026
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गम का दरिया: फरकान एस खान की उदासी भरी शायरी
“गम का दरिया: फरकान एस खान की उदासी भरी शायरी”
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https://www.vews.in/hum-aur-zindagi/river-of-sorrow-furkan-s-khans-sad-shayari
Date
01 September 2026
Shayari — By Furkan S Khan
गम का दरिया है, ये दिल डूबता चला गया, हर खुशी से रिश्ता, अब टूटता चला गया। आँखों में नमी है, लबों पे खामोशी है, हर ख्वाब मेरा, अब लूटता चला गया।
Shayari — By Furkan S Khan
तन्हाई में जीना अब आदत सी बन गई है, हर खुशी से दूर अब फुरकत सी बन गई है। आँखों में नमी है, लबों पे मुस्कान नहीं, ज़िंदगी मेरी अब बस हसरत सी बन गई है।
Shayari — By Furkan S Khan
चेहरे पे मेरे लाख मुस्कान सही, दिल में छुपा है एक तूफान सही। हर बात पे हँसता हूँ दुनिया के लिए, अंदर से तो मैं हूँ बेजान सही।

दरिया: नदी, सागर। डूबता: डूब रहा है। रिश्ता: संबंध। टूटता: टूट रहा है। नमी: गीलापन, आँसू। लबों: होंठों पर। खामोशी: चुप्पी। ख्वाब: सपना। लूटता: लूटा जा रहा है।

तन्हाई: अकेलापन। आदत: स्वभाव, लत। फुरकत: जुदाई, अलगाव। नमी: गीलापन (आँसुओं से)। लबों: होंठों पर। मुस्कान: हँसी। हसरत: अधूरी इच्छा, आरज़ू।

लाख: बहुत, अनेक। मुस्कान: हँसी। तूफान: आँधी, बवंडर। छुपा: छिपा हुआ। दुनिया: संसार, लोग। बेजान: निर्जीव, जिसमें जान न हो।

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Zainab
लेखक

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